“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
तुम्हारे जाने के बाद का कमरा
तुम चली जाती हो
तो कमरा
अचानक थोड़ा खाली हो जाता है।
मगर मेज़, खिड़की
और हवा की हर हल्की हलचल में
तुम्हारी मौजूदगी
अब भी बची रहती है।
शायद
इसी को
मोहब्बत कहते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,
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