सबसे मुश्किल है ‘मैं ठीक हूँ’ कहना
सबसे मुश्किल है
‘मैं ठीक हूँ’ कहना।
ये दो शब्द
ज़ुबान से निकलते तो हैं आसानी से,
पर गले में
काँटों की तरह अटक जाते हैं।
क्योंकि हर बार जब कोई पूछता है,
तो जवाब में
सिर्फ़ ‘ठीक हूँ’ कहना पड़ता है,
जबकि भीतर
सारे शहर ढह चुके होते हैं।
‘मैं ठीक हूँ’
दरअसल सबसे बड़ा झूठ है
जो हम अपने ही टुकड़ों पर
पर्दा डालने के लिए बोलते हैं।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment