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Saturday, 21 February 2026

पासवर्ड से बंद दिल

पासवर्ड से बंद दिल


उसने कहा

दिल अब खुलता नहीं,

बहुत कोशिश की लोगों ने

पर हर बार

“इनकरेक्ट पासवर्ड” आया।


कभी यह दरवाज़ा

बस एक मुस्कान से खुल जाता था,

अब सुरक्षा इतनी कड़ी है

कि भावनाएँ भी

ओटीपी माँगती हैं।


हर चोट के बाद

उसने एक नया अक्षर जोड़ लिया

एक कैपिटल दर्द,

एक स्पेशल कैरेक्टर-सी याद,

और कुछ अंक

जो सिर्फ़ उसे याद हैं।


लोग दस्तक देते हैं,

पर वह स्क्रीन पर

“एक्सेस डिनाइड” दिखा देता है।

उन्हें क्या पता—

अंदर अभी भी

एक बच्चा बैठा है,

जो पासवर्ड भूल गया है

अपने ही विश्वास का।


दिल बंद है,

पर धड़कनें चालू

जैसे कोई सर्वर

फायरवॉल के पीछे

चुपचाप काम कर रहा हो।


शायद

कभी कोई आए

जो पासवर्ड न पूछे,

बस हथेली रख दे

और कहे

“मैं लॉग-इन नहीं,

सिर्फ़ साथ बैठने आया हूँ।”


तब

संभव है

दिल अपनी सुरक्षा कम कर दे,

और दुनिया को

फिर से

ओपन-सोर्स बना दे।


मुकेश ,,,,,,,,


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