होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Thursday, 5 March 2026

तुम्हारे नाम का दार्शनिक सूत्र

 तुम्हारे नाम का दार्शनिक सूत्र


मैंने बहुत ग्रंथ पढ़े,

सूत्रों की संक्षिप्त अग्नि में

अर्थों के पर्वत जलते देखे।


वहाँ हर सत्य

कुछ शब्दों में बाँध दिया गया था

जैसे ब्रह्मांड

एक छोटी-सी पंक्ति में समा जाए।


मैंने सोचा,

क्या प्रेम का भी

कोई सूत्र हो सकता है?


बहुत देर तक

मैंने तर्क के अक्षरों को जोड़ा,

भावनाओं की ध्वनियाँ तौलीं,

अनुभव की राख में

कोई स्थायी चिन्ह खोजा।


पर हर बार

जब निष्कर्ष लिखने बैठा,

काग़ज़ पर

तुम्हारा नाम उतर आया।


तब समझ आया—

कुछ सूत्र

व्याकरण से नहीं बनते,

वे किसी उपस्थिति से जन्म लेते हैं।


तुम्हारा नाम

मेरे लिए

एक दार्शनिक सूत्र है


जिसे पढ़ते ही

अस्तित्व का अर्थ

थोड़ा और स्पष्ट हो जाता है।


जैसे किसी जटिल विचार के बाद

अचानक मिल जाए

सरलता की रोशनी।


अब जब भी

जीवन का कोई प्रश्न

मुझे उलझाता है,


मैं बस

तुम्हारा नाम दोहराता हूँ

और लगता है

मानो किसी प्राचीन शास्त्र का

सबसे छोटा

पर सबसे गहरा सूत्र

मेरे भीतर खुल गया हो।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment