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Tuesday, 17 March 2026

तुम्हारी कॉफ़ी की महक में मेरा इंतज़ार

 तुम्हारी कॉफ़ी की महक में मेरा इंतज़ार


तुम आई थीं

और मेज़ पर

आधी कॉफ़ी छोड़ गई थीं।


अब भी

उस कप से उठती हल्की महक में

तुम्हारी उँगलियों की गर्मी है।


मैं हर घूँट में

तुम्हारा नाम सुनता हूँ

और लगता है

मेरा इंतज़ार

कॉफ़ी की उसी भाप में

धीरे-धीरे घुल रहा है।


मुकेश ,,,,,

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