बस तुम”
तुम्हारे क़रीब
आकर
दिल कोई बात नहीं करता
बस धड़कता है…
कुछ ज़्यादा,
कुछ गहराई से।
तुम्हारा नाम
होंठों तक आते-आते
एक एहसास बन जाता है,
जिसे मैं
कह नहीं पाता
सिर्फ़ जीता हूँ।
तुम छूती नहीं,
फिर भी
हर जगह महसूस होती हो
जैसे रूह में
धीरे-धीरे उतरती हुई कोई गर्म रौशनी।
और उस एक लम्हे मे
मुकेश्,,,
मैं नहीं रहता,
सिर्फ़
हम रह जाते हैं…
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