डेनिम जैकेट और तुम्हारी बेपरवाह चाल
डेनिम जैकेट में
जब तुम आगे बढ़ती हो,
तो रास्ते अपने नियम भूल जाते हैं—
कदम खुद-ब-खुद तुम्हारी लय पकड़ लेते हैं।
तुम्हारी चाल में कोई जल्दबाज़ी नहीं,
कोई बनावट नहीं
बस एक सहज-सा भरोसा है
कि दुनिया दो पल ठहर ही जाएगी।
जैकेट की जेबों में हाथ डाले तुम
इतनी आज़ाद लगती हो,
जैसे हवाओं से
कोई पुराना समझौता हो तुम्हारा।
डेनिम की सख़्ती के भीतर
तुम्हारी नर्म रूह छुपी है
और उस बेपरवाह चाल में
एक पूरा जीवन मुस्कुराता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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