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Wednesday, 4 March 2026

नीली जींस, सफ़ेद टॉप की सादगी में लिपटी हुई तुम

 नीली जींस,

सफ़ेद टॉप की सादगी में लिपटी हुई तुम

जैसे बादलों के बीच

अचानक उतर आई कोई साफ़ दोपहर।


कानों में सफ़ेद बुँदे

धीरे-धीरे झिलमिलाती हैं,

मानो हर मोती

तुम्हारी मुस्कान का

छोटा-सा राज़ हो।


बॉब्ड कट खुले बाल

जब हवा से बातें करते हैं,

तो लगता है

शहर की सारी गलियाँ

तुम्हारी चाल के पीछे चल पड़ी हों।


मैचिंग नेल पॉलिश से सजी उंगलियाँ

जब ज़रा-सा बाल समेटती हैं,

तो दिल की धड़कन

अपना क़दम भूल जाती है।


सच,

इस सादगी की आग में

कोई शोर नहीं

बस एक ख़ामोश क़यामत है,

जो तुम्हारे होने से

हर बार

नया मौसम बना देती है।


मुकेश ,,,,,,,,

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