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Monday, 16 March 2026

इश्क़ — ज़िंदगी की साँस

 इश्क़ — ज़िंदगी की साँस


इश्क़

सिर्फ़ एक एहसास नहीं

वो ज़िंदगी के लिए

हवा है, धूप है,

ख़ाद है, पानी है।


जिस तरह

हवा के बिना

साँस अधूरी हो जाती है,

उसी तरह

इश्क़ के बिना

दिल की धड़कनें भी

सूनी लगती हैं।


वो धूप की तरह है

जो ठंडी रूह को

गरमाहट देती है,

और अँधेरी राहों में

उम्मीद की रौशनी भर देती है।


वो पानी की तरह है—

जो सूखी ज़मीन-ए-दिल को

फिर से हरा-भरा कर देता है,

और ख़्वाबों के बीज को

चुपचाप अंकुर बना देता है।


और वो ख़ाद की तरह है

जो दर्द और तजुर्बों की मिट्टी में

मोहब्बत का पौधा उगा देती है।


इसलिए

इश्क़ को हल्के में मत समझो

क्योंकि वही

ज़िंदगी के बाग़ को

महकाता भी है

और सँभालता भी।


सच तो यह है—


इश्क़

ज़िंदगी के लिए

सिर्फ़ एक जज़्बा नहीं,


बल्कि

उसकी सबसे ज़रूरी साँस है।


मुकेश ,,,,,,,,,

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