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Wednesday, 18 March 2026

ख़ुशबू का अदृश्य पत्र

ख़ुशबू का अदृश्य पत्र


कभी-कभी

कोई ख़त

लिखा तो जाता है

पर भेजा नहीं जाता।


वह

साँसों की महक बनकर

हवा में उड़ता रहता है।


जिसे

कोई डाकिया नहीं लाता,


पर दिल

उसे फिर भी पढ़ लेता है।


मुकेश ,,,,,,


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