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Wednesday, 18 March 2026

साँसों में छिपा हुआ मौसम

 साँसों में छिपा हुआ मौसम


तुम्हारी साँसों में

एक मौसम छिपा है


कभी

वह बसंत की तरह महकता है,


कभी

शाम की ठंडी हवा बन जाता है।


और कभी

बरसात की पहली मिट्टी की तरह

दिल को

अचानक भर देता है।


शायद

इसीलिए

तुम्हारे पास बैठना

मौसम बदलने जैसा लगता है।


मुकेश ,,,

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