जब हवा कोई राज़ कहती है
रात के सन्नाटे में
जब हवा धीरे-धीरे चलती है,
तो लगता है
जैसे वह
कोई पुराना राज़ कह रही हो।
किसी की याद,
किसी की हँसी,
किसी की साँसों की महक
सब
उसके साथ चलने लगते हैं।
और तब
दिल समझ जाता है
कि हवा
कभी खाली नहीं चलती।
मुकेश ,,,,,,,
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