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Saturday, 28 March 2026

ख़ामोशी का दरिया

 ख़ामोशी का दरिया 

हमारे दरमियान
अब लफ़्ज़ नहीं बहते
बस एक ख़ामोशी है,
जो दरिया बन गई है।

मैं उस दरिया में
डूबता हूँ हर रात
और हर बार
कुछ नया पा लेता हूँ।

तुम्हारी आवाज़ नहीं,
फिर भी एक सदा है
जो दिल के भीतर
गूंजती रहती है।

शायद इश्क़ वही है
जहाँ बोलना छोड़कर
सुनना शुरू हो जाता है।


मुकेश ,,,,,

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