“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
रूह की प्यास
मेरी रूह में
एक प्यास है
जो पानी से नहीं,
तुमसे बुझती है।
मैंने इबादत में भी
तुम्हें ढूँढा,
और गुनाहों में भी
मगर तुम हर जगह
बस एक अहसास बनकर
रहे।
अब समझ आया
तुम कोई शख़्स नहीं,
एक रास्ता हो
जो मुझे
मेरे रब तक ले जाता है।
मुकेश ,,,,,,,,
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