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Saturday, 28 March 2026

रूह की प्यास

 रूह की प्यास 


मेरी रूह में

एक प्यास है

जो पानी से नहीं,

तुमसे बुझती है।


मैंने इबादत में भी

तुम्हें ढूँढा,

और गुनाहों में भी

मगर तुम हर जगह

बस एक अहसास बनकर

रहे।


अब समझ आया

तुम कोई शख़्स नहीं,

एक रास्ता हो

जो मुझे

मेरे रब तक ले जाता है।


मुकेश ,,,,,,,,

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