. हमारे दिन
हमारी उम्र
ढह रही है
पुरानी इमारतों की दीवारों की तरह।
ट्रैफिक की भागती सड़कों पर
दौड़ने के दिन
अब हमारे नहीं रहे।
अब
शाम की किसी बेंच पर बैठकर
धीरे-धीरे
शहर को गुजरते देखना चाहिए हमें।
2. हमारे दिन
हमारी उम्र
थक गई है
मेट्रो की सीढ़ियों की तरह।
जल्दी-जल्दी
प्लेटफ़ॉर्म बदलने के दिन
अब हमारे नहीं हैं।
अब
एक खिड़की के पास बैठकर
धीरे-धीरे
शाम को उतरते देखना चाहिए हमें।
3. हमारे दिन
हमारी उम्र
भर गई है
पुरानी लाइब्रेरी की अलमारियों की तरह।
हर खबर पर
बहस करने के दिन
अब हमारे नहीं रहे।
अब
किसी शांत पन्ने की तरह
थोड़ा-थोड़ा
खुद को पढ़ना चाहिए हमें।
4. हमारे दिन
हमारी उम्र
धीमी हो गई है
शहर के पुराने पार्क की पगडंडी की तरह।
भागती भीड़ के साथ
चलने के दिन
अब हमारे नहीं हैं।
अब
पेड़ों की छाया में बैठकर
समय को
धीरे-धीरे गुजरने देना चाहिए हमें।
5. हमारे दिन
हमारी उम्र
ढल रही है
शाम की स्ट्रीट लाइट की रोशनी की तरह।
चमकती दुकानों के बीच
खो जाने के दिन
अब हमारे नहीं हैं।
अब
अपने छोटे-से कमरे की खिड़की से
शहर को
दूर से देखना चाहिए हमें।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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