“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
यह ज़रूरी नहीं
कि हर सफ़र मंज़िल तक पहुँचे।
पर कुछ रास्ते सिर्फ़ इसलिए चलते हैं कि कहीं कोई इंतज़ार करता है।
मैं उसी इंतज़ार की तरफ़ चल रहा हूँ।
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