“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
बहुत-सी बातें
कहने से रह गई थीं, बहुत-से शब्द दिल में ही सो गए।
मैं उन्हें जगाने आऊँगा।
तुम बस सुन लेना बिना सवाल के।
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