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Monday, 9 March 2026

छह महीने का अपने आप में खेलता बच्चा

 छह महीने का अपने आप में खेलता बच्चा

कमरे की नरम रोशनी में

फर्श पर बिछी चादर पर

एक छोटा-सा बच्चा

अपने ही संसार में खेल रहा है।


उसकी मुट्ठियाँ

बार-बार खुलती और बंद होती हैं,

जैसे हवा को पकड़ लेने की

कोई नई कोशिश कर रही हों।


वो अपने पैरों को देखता है

जैसे पहली बार

दुनिया की कोई अद्भुत चीज़

उसके सामने आई हो।


कभी

बिना वजह हँस पड़ता है,

कभी

अपनी ही आवाज़ से

खुद चौंक जाता है।


उसकी आँखों में

अभी कोई चिंता नहीं,

न कोई सवाल,

बस एक गहरा आश्चर्य

कि यह दुनिया

कितनी नई है।


वो

अपने ही हाथों से

अपने ही चेहरे को छूता है,

जैसे खुद को ही

पहली बार पहचान रहा हो।


कमरे में

उसकी छोटी-सी हँसी

लहर की तरह फैल जाती है,

और अचानक

सब कुछ थोड़ा हल्का लगने लगता है।


वो छह महीने का बच्चा

कुछ नहीं जानता

न समय,

न भविष्य,

न बीते हुए कल का बोझ।


वो बस

जीवन के सबसे पहले रहस्य में है

जहाँ

हर चीज़

पहली बार

घट रही होती है।


मुकेश ,,,,,,,,,

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