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Monday, 9 March 2026

बच्चे के काजल का दिथौना लगाती औरत

 बच्चे के काजल का दिथौना लगाती औरत

सुबह की हल्की रोशनी में

गोद में लिए

एक औरत

अपने छोटे-से बच्चे को

ध्यान से देख रही है।


उसकी उँगली पर

थोड़ा-सा काजल लगा है,

और वह

बच्चे के गाल के कोने पर

एक छोटा-सा दिथौना बना देती है।


जैसे

दुनिया की सारी बुरी नज़रें

अब

यहीं आकर रुक जाएँगी।


बच्चा

उसकी आँखों में देखता है

और बिना वजह

मुस्कुरा देता है

जैसे उसे मालूम हो

कि यह स्पर्श

सिर्फ़ काजल का नहीं,

ममता का है।


औरत की आँखों में

एक अजीब-सी तसल्ली है,

जैसे वह

अपने छोटे-से बच्चे को

नज़र से ही नहीं

दुनिया की हर बुराई से

बचाना चाहती हो।


उसकी उँगलियाँ

धीरे से बच्चे के माथे को

सहलाती हैं,

और वह

एक पल को

उसे अपने सीने से लगा लेती है।


उस छोटे-से दिथौने में

कोई जादू नहीं,

पर उसमें

माँ की वह पुरानी आस्था है


कि प्रेम

अगर सच्चा हो

तो

दुनिया की नज़र भी

कमज़ोर पड़ जाती है।


मुकेश ,,,,,,,,,

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