माँ के आँचल में दूध पीता बच्चा
शाम की हल्की शांति में
माँ की गोद में
एक छोटा-सा बच्चा
आँचल की ओट में
दूध पी रहा है।
उसकी छोटी उँगलियाँ
माँ की साड़ी को
धीरे-धीरे पकड़ लेती हैं,
जैसे दुनिया की
सबसे सुरक्षित जगह
उसे मिल गई हो।
माँ की आँखें
कभी बच्चे के चेहरे पर टिकती हैं,
कभी
किसी अनकहे स्नेह में
धीरे-धीरे भीग जाती हैं।
कमरे में
कोई शोर नहीं है
बस बच्चे की
हल्की-हल्की साँसें
और माँ के दिल की
मौन धड़कन।
उस पल
समय भी
जैसे ठहर जाता है,
जैसे सृष्टि का
सबसे पुराना और पवित्र दृश्य
फिर से घट रहा हो।
माँ का आँचल
सिर्फ़ कपड़ा नहीं—
वो एक आकाश है
जहाँ
एक नया जीवन
अपनी पहली शांति
ढूँढ़ लेता है।
और उस छोटे-से पल में
दुनिया की सारी जटिलताएँ
कहीं दूर रह जाती हैं
क्योंकि
माँ के आँचल में
दूध पीता वह बच्चा
दरअसल
प्रेम की
सबसे पहली
और सबसे सच्ची भाषा सीख रहा होता है।
मुकेश ,,,,,,,,
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