रात भर तुमसे बात करता रहा दिल
रात भर
तुमसे बात करता रहा दिल,
लब ख़ामोश थे
मगर हर धड़कन
तुम्हारा नाम दोहराती रही।
नींद दरवाज़े पर आई भी,
तो लौट गई चुपचाप
उसे क्या मालूम,
इस घर में आज
तुम्हारी याद ठहरी है।
मैंने चाँद से भी पूछा
तुम्हारा पता,
वो मुस्कुरा के बादलों में छुप गया
शायद उसे भी
हमारी बातों की ख़बर थी।
तुम कहीं नहीं थीं,
फिर भी हर तरफ़ थीं
जैसे हवा में घुली हुई
कोई अदृश्य सरगोशी।
और मैं…
हर लम्हा तुम्हें सुनता रहा,
हर ख़ामोशी में
तुम्हें जवाब देता रहा
सुबह हुई तो जाना,
ये रात तो गुज़र गई,
मगर दिल
अब भी तुमसे बात करता है।
मुकेश ,,,,,,,
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