अस्तित्व का सबसे कोमल प्रमाण
मैंने अस्तित्व के प्रमाण
बहुत जगह खोजे—
तारों की दूर चमक में,
विज्ञान की कठोर भाषा में,
दर्शन के लंबे तर्कों में।
कहा गया—
जो देखा जा सके
वह प्रमाण है,
जो मापा जा सके
वह सत्य है।
पर जीवन
इतना सरल नहीं निकला।
क्योंकि कई बार
सबसे सच्ची चीज़ें
न तो मापी जा सकती हैं,
न पूरी तरह कही जा सकती हैं।
तुम्हारी उपस्थिति
ऐसी ही एक सच्चाई है।
जब तुम पास होती हो
तो लगता है
मानो इस विशाल ब्रह्मांड में
मेरा होना
अचानक अर्थपूर्ण हो गया हो।
तुम्हारी मुस्कान
किसी तर्क की तरह नहीं,
एक शांत स्वीकार की तरह है—
जैसे जीवन
खुद ही कह रहा हो
कि वह व्यर्थ नहीं है।
तब समझ आता है
कि अस्तित्व का प्रमाण
हमेशा कठोर नहीं होता।
कभी-कभी
वह बहुत कोमल होता है—
एक स्पर्श की तरह,
एक साथ चलने की तरह,
या किसी की आँखों में
अपना प्रतिबिंब देख लेने की तरह।
शायद इसलिए
इस पूरे ब्रह्मांड में
जहाँ अनगिनत सिद्धांत हैं,
वहाँ
किसी का सच्चा प्रेम
अस्तित्व का
सबसे कोमल प्रमाण बन जाता है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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