होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Wednesday, 25 March 2026

बंद खिड़की के पीछे कैद होती हवा

 बंद खिड़की के पीछे कैद होती हवा


बंद खिड़की के पीछे

हवा कैद नहीं होती

बस

अपना रास्ता भूल जाती है।


परदे हल्के-हल्के हिलते हैं,

जैसे कोई याद

अंदर आना चाहती हो।


कमरा भरा है,

फिर भी कुछ कमी है

शायद

एक खुलापन…


मनोविज्ञान कहता है

हम खुद को

दीवारों से नहीं,

अपने डर से बंद करते हैं।


खिड़की खोलो

हवा नहीं,

शायद

तुम खुद

अंदर आ जाओ…।


मुकेश ,,,,,,,

No comments:

Post a Comment