यहाँ हर इंसान बोल रहा है
1.
यहाँ हर इंसान बोल रहा है
इतना बोल रहा है
कि
शब्दों की भी साँस फूल रही है।
2.
मैंने
कई आवाज़ें सुनी हैं
पर
किसी में
ठहराव नहीं मिला।
3.
हर कोई
कुछ कहना चाहता है
पर
कोई यह नहीं सुनता
कि सामने वाला
क्या कह रहा है।
4.
बातें
अब समझने के लिए नहीं,
सिर्फ़ जताने के लिए होती हैं
जैसे
सच नहीं,
शोर ज़रूरी हो गया हो।
5.
मैंने
एक खामोश आदमी देखा
लोग उसे
कमज़ोर समझ रहे थे
पर
वो
सबसे ज़्यादा सुन रहा था।
6.
यहाँ
हर किसी के पास
अपनी-अपनी सच्चाई है
और
किसी के पास
दूसरे की जगह नहीं।
7.
शब्द
अब पुल नहीं बनाते
दीवारें खड़ी करते हैं
और
हम
उन्हीं में कैद हो जाते हैं।
8.
कभी-कभी
मन करता है
सब कुछ बंद कर दूँ
और
सिर्फ़ हवा की आवाज़ सुनूँ।
9.
ज़िन्दगी
शायद
कहने से ज़्यादा
सुनने में थी
हमने ही
उसे उल्टा समझ लिया।
10.
ऐसे भी लोग हैं
जो
चुप रहकर
सब कह देते हैं
और
ऐसे भी
जो बोलकर भी
कुछ नहीं कहते।
11.
यहाँ हर इंसान बोल रहा है
और मैं
थोड़ा-सा
चुप हो गया हूँ
शायद
किसी दिन
कोई
सुनने लगे।
मुकेश ,,,,
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