बरसात में भुट्टा बेचती औरत - एक शब्द चित्र
1
बरसात की बूँदें
धीरे-धीरे गिर रही हैं,
और वो अंगीठी के पास
भुट्टे सेंक रही है।
2
धुएँ में
उसका चेहरा आधा छिपा है,
आँखों में
एक सीधी-सी चमक।
3
भुट्टा आग पर घूमता है,
और उसकी उँगलियाँ
आदत से
हर दाना पहचानती हैं।
4
कुछ पुरुष
भुट्टा लेने के बहाने रुकते हैं,
नज़रें भुट्टे पर कम,
उस पर ज़्यादा ठहरती हैं।
5
वो समझती है,
पर अनदेखा करती है—
जैसे ये भी
रोज़ का हिस्सा हो।
6
लड़कियाँ हँसती हुई कहती हैं,
“थोड़ा और नमक…
नींबू भी ज़्यादा लगाओ।”
7
वो मुस्कुराकर
भुट्टे को पत्ते में लपेटती है,
नमक-मिर्च की खुशबू
बारिश में घुल जाती है।
8
हाथ तेज़ हैं उसके,
पर चाल में
एक थकी हुई ठहराव।
9
कोई मोबाइल बढ़ाता है,
वो QR कोड दिखा देती है,
और कुछ सिक्के
चुपचाप बोरी के नीचे सरका देती है।
10
बारिश, धुआँ, और भीड़
सबके बीच
वो खड़ी है
अपने छोटे-से संसार के साथ।
11
उसकी हथेलियों में
गर्म भुट्टा है,
और आँखों में
ठंडी समझदारी।
12
बरसात में भुट्टा बेचती औरत
सिर्फ़ स्वाद नहीं देती,
थोड़ी-सी ज़िंदगी
भी थमा जाती है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,
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