वो खुश हो जाती है
बस गोलगप्पे खिला देने से,
जैसे स्वाद नहीं,
किसी ने उसे याद किया हो।
McDonald’s का एक छोटा-सा बर्गर,
उसके लिए दावत नहीं
तुम्हारा साथ होता है।
Pizza Hut की एक स्लाइस में भी,
वो ढूंढ लेती है
रिश्ते की गर्माहट।
एक पसंदीदा कपड़ा
बस इतना ही काफी है,
उसे यह यकीन दिलाने के लिए
कि तुमने उसे देखा है।
जब तुम कहते हो
“खाना बहुत अच्छा बना है”,
वो मुस्कुराती नहीं,
भीतर कहीं खिल उठती है।
उसकी नाराज़गी भी अजीब है
बात छोटी होती है,
पर उसमें छुपा होता है
अनदेखा रह जाने का डर।
वो रूठती है
क्योंकि उसे हक़ लगता है,
और मनाने की उम्मीद
प्यार की भाषा होती है।
कभी एक मैसेज ना आए
तो दिल में सवाल उठते हैं,
“याद हूँ भी या नहीं?”
उसकी खुशी बड़ी नहीं होती
बस सच्ची होती है,
इसलिए छोटी-छोटी चीज़ों में
पूरा दिल लगा देती है।
वो गुस्सा भी करती है
और उसी में छुपा होता है,
कि उसे परवाह है
तुम्हारे हर छोटे व्यवहार की।
मुकेश ,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment