“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
मुमकिन है
मेरे आने में
कई साल लग जाएँ,
या शायद
कुछ जन्म भी।
पर विश्वास रखना
कुछ रिश्ते
रास्ता भूलते नहीं।
मैं
कभी न कभी
तुम तक पहुँच ही जाऊँगा।
मुकेश ,,,,,,,,
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