“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
रास्ते बदल गए हैं,
नक्शे भी अब पुराने नहीं रहे।
फिर भी
दिल के किसी कोने में
तुम्हारी दिशा
अब भी साफ़ लिखी है।
मैं
कभी न कभी
उसी तरफ़ चल पड़ूँगा।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
No comments:
Post a Comment