तकिये के पास रखा हुआ सपना
तकिये के पास
रखा हुआ है
एक छोटा-सा सपना।
रात भर
वह आँखों की
हल्की नींद में
आता-जाता रहा।
कभी
तस्वीर बनकर,
कभी
बस एक एहसास बनकर।
सुबह हुई
तो सपना
कहीं दिखाई नहीं दिया
पर तकिये के पास
अब भी
थोड़ी-सी
उसकी गर्माहट पड़ी है
मुकेश ,,,,,,,,,
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