“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
देर रात का जागता हुआ इश्क़
देर रात
जब घर की सारी बत्तियाँ
एक-एक करके बुझ जाती हैं,
और घड़ी
अपनी धीमी आवाज़ में
समय को टटोलती रहती है।
तभी
दिल के किसी कोने में
एक छोटी-सी रोशनी
अब भी जलती रहती है
उसी रोशनी का नाम
शायद
जागता हुआ इश्क़ है।
मुकेश्,,,
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