होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Saturday, 14 March 2026

किसी मोड़ पर खड़ी हुई याद

 किसी मोड़ पर खड़ी हुई याद

किसी मोड़ पर

खड़ी हुई है

एक पुरानी याद।

न आगे बढ़ती है,

न पीछे लौटती है—

बस

रास्तों को देखती रहती है

चुपचाप।

कभी कोई गुज़रता है

तो वह

हल्के से

दिल को छू जाती है।

जैसे

वक़्त आगे बढ़ गया हो,

पर

एक पल

अब भी वहीं ठहरा हो।

मुकेश्,,, 

No comments:

Post a Comment