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Thursday, 5 March 2026

आत्मा की प्रयोगशाला में तुम

 आत्मा की प्रयोगशाला में तुम


मेरी आत्मा

कोई मंदिर नहीं है,

जहाँ केवल प्रार्थनाएँ गूँजती हों

वह एक प्रयोगशाला है,

जहाँ अनुभवों की शीशियाँ

धीरे-धीरे उबलती रहती हैं।


यहाँ स्मृतियाँ

रसायनों की तरह मिलती हैं,

और विचार

बनाते हैं नए सूत्र।


इसी प्रयोगशाला में

एक दिन

तुम आकर ठहर गईं

जैसे किसी शांत द्रव में

अचानक गिर जाए

रोशनी की एक बूँद।


मैंने सोचा था

प्रेम एक भावना है,

पर तुमने उसे

एक प्रयोग बना दिया।


तुम्हारी मुस्कान

एक उत्प्रेरक थी—

जिसने मेरी चुप्पियों को

प्रतिक्रिया में बदल दिया।


तुम्हारी आँखें

सूक्ष्मदर्शी की तरह थीं,

जिनमें झाँककर

मैंने अपने ही मन के

अनदेखे कण देखे।


मैंने तर्क की कसौटी पर

बहुत कुछ परखा,

पर जब भी

दिल की किसी शीशी को खोला

उसमें तुम्हारी खुशबू मिली।


तब समझ आया

आत्मा की प्रयोगशाला में

कुछ परिणाम

सूत्रों से नहीं निकलते,

वे केवल

उपस्थिति से बनते हैं।


यहाँ प्रेम

कोई सिद्धांत नहीं,

एक निरंतर प्रयोग है

जहाँ हर स्पर्श

नया परिणाम देता है।


और तुम

इस पूरी प्रयोगशाला की

सबसे रहस्यमयी खोज हो,


जिसे समझने के लिए

मुझे अभी

कई जन्मों के प्रयोग

और करने होंगे।


मुकेश -------------

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