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Saturday, 14 March 2026

बाजीराव प्रथम - घोड़े की चाल और इतिहास की धड़कन

 बाजीराव प्रथम

घोड़े की चाल और इतिहास की धड़कन


इतिहास के कुछ नाम

तलवार से नहीं,

रफ्तार से पहचाने जाते हैं।


बाजीराव भी

ऐसा ही एक नाम था


जिसके घोड़े की टाप

मानो धरती से पूछती थी,

“सीमाएँ आखिर बनाता कौन है?”


कहते हैं

वह युद्धभूमि में

केवल सेनापति नहीं था,

वह एक विचार था—


कि

साहस कभी

रुकना नहीं जानता।


यमुना के किनारों से

नर्मदा के जल तक

उसकी रणनीति

बिजली की तरह दौड़ती थी,


और दुश्मन सोचते रह जाते

युद्ध कब शुरू हुआ

और कब

उनकी हार इतिहास बन गई।


पर

इतिहास के शोर से दूर

एक और कहानी भी थी


एक मनुष्य की

जिसके भीतर

सत्ता से अधिक

एक बेचैन आत्मा थी।


कभी-कभी

वह आकाश को देखता होगा

और सोचता होगा


कि

इतनी जीतों के बाद भी

मनुष्य आखिर

किस विजय की तलाश में रहता है।


शायद इसलिए

उसकी तलवार की चमक से अधिक

उसकी यात्रा याद रह गई


क्योंकि

कुछ लोग

राज्य नहीं जीतते,

वे समय की दिशा बदल देते हैं।


मुकेश ,

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