वो मेरे बारे में सब कुछ याद रखती है
और मैं उसे ही भूल जाता हूँ।
उसे रहता है
किस फ़ंक्शन में
मैंने किस रंग की शर्ट पहनी थी,
किस पल
मैंने भीड़ में
किस लड़की को ज़रा ज़्यादा देखा था,
और कब
मैंने यूँ ही
बिना सोचे
उससे क्या कह दिया था।
उसे याद है
मेरे लफ़्ज़,
मेरी आदतें,
मेरी लापरवाहियाँ भी।
और मुझे
मुझे तो यह भी याद नहीं
कि पिछली मुलाक़ात में
वो किस रंग में थी…
वो जानती है
मुझे ठंडी कॉफ़ी पसंद है…”
मुझे याद नहीं आता
कि मैंने कब बताया था,
या बताया भी था
या नहीं।
उसे याद है
मेरी हर छोटी-सी बात,
जैसे मैं
उसकी ज़ेहन की डायरी में
बारीकी से दर्ज हूँ।
और मैं
उसकी किताब का
वही पन्ना हूँ
जिसे पढ़ा तो है,
पर याद नहीं रखा।
कभी-कभी लगता है
वो मुझे
मुझसे ज़्यादा जानती है,
और मैं
उसे जानने की कोशिश में
बस सवालों में उलझा रहता हूँ।
वो मेरी तरफ़ देखती है
एक हल्की मुस्कान के साथ
जैसे उसे पता हो
कि मैं भूल जाऊँगा,
और वो
याद रखेगी।
शायद
औरतें यूँ ही नहीं याद रखतीं
वो उन लम्हों को
महफ़ूज़ करती हैं
जिनमें
कोई और बस यूँ ही
गुज़र जाता है।
और मैं सोचता हूँ
वो मुझे याद रखती है,
जैसे कोई मोहब्बत याद रखी जाती है…
और मैं उसे भूलता हूँ,
जैसे कोई सच
जिसे मानने से डर लगता हो।
मुकेश ,,,,,,,,,,,
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