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Wednesday, 22 April 2026

धूल भरी किताब

 धूल भरी किताब

1

धूल भरी किताब

शेल्फ़ के कोने में पड़ी है,

जैसे कोई आवाज़

बरसों से दबाई गई हो।

2

उसके पन्नों पर

समय जम गया है,

हर शब्द

धीरे-धीरे ढक गया है।

3

कभी कोई

इसे खोलता था,

अब उँगलियाँ

बस धूल लिखती हैं।

4

पहला पन्ना पलटो,

तो एक गंध उठती है

जैसे बीते दिनों

फिर से लौट आए हों।

5

कुछ पन्ने मुड़े हुए हैं,

जहाँ किसी ने

खुद को रोका था।

6

अंदर लिखी बातें

अब भी ताज़ा हैं,

बस पढ़ने वाली आँखें

थोड़ी दूर हो गई हैं।

7

कवर फीका पड़ गया है,

पर भीतर

अब भी रंग बाकी है।

8

वो चुप है,

पर हर पन्ना

कुछ कहना चाहता है।

9

एक दिन

कोई फिर से खोलेगा,

और ये धूल

कहानी बन जाएगी।

10

धूल भरी किताब

भूले हुए लफ़्ज़ों का घर,

जो इंतज़ार में

अब भी खुला है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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