छाँह में लेटा कुत्ता
1
छाँह में लेटा कुत्ता
दोपहर को
धीरे-धीरे पी रहा है।
2
आँखें आधी खुली,
आधी बंद
जैसे दुनिया से
आधा रिश्ता बचा हो।
3
जीभ बाहर निकली है,
साँसें तेज़—
पर भीतर
एक अजीब सुकून है।
4
कानों में हल्की हलचल,
हर आहट पर
थोड़ा-सा जाग जाता है।
5
धरती से सटा बदन,
जैसे गर्मी को
नीचे उतार रहा हो।
6
कोई पास से गुज़रे,
तो पल भर देखे
फिर उसी आलस में
डूब जाए।
7
छाँह छोटी पड़ती है,
तो वो
थोड़ा-सा खिसक जाता है।
8
न कोई चिंता,
न कोई हिसाब
बस इस पल का
पूरा आराम।
9
कभी पूँछ हिलती है,
जैसे किसी
अदृश्य दोस्त से बात हो।
10
छाँह में लेटा कुत्ता
जीना जानता है,
बिना वजह
खुश रहना भी।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,
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