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Wednesday, 22 April 2026

छाँह में लेटा कुत्ता

 छाँह में लेटा कुत्ता

1

छाँह में लेटा कुत्ता

दोपहर को

धीरे-धीरे पी रहा है।

2

आँखें आधी खुली,

आधी बंद

जैसे दुनिया से

आधा रिश्ता बचा हो।

3

जीभ बाहर निकली है,

साँसें तेज़—

पर भीतर

एक अजीब सुकून है।

4

कानों में हल्की हलचल,

हर आहट पर

थोड़ा-सा जाग जाता है।

5

धरती से सटा बदन,

जैसे गर्मी को

नीचे उतार रहा हो।

6

कोई पास से गुज़रे,

तो पल भर देखे

फिर उसी आलस में

डूब जाए।

7

छाँह छोटी पड़ती है,

तो वो

थोड़ा-सा खिसक जाता है।

8

न कोई चिंता,

न कोई हिसाब

बस इस पल का

पूरा आराम।

9

कभी पूँछ हिलती है,

जैसे किसी

अदृश्य दोस्त से बात हो।

10

छाँह में लेटा कुत्ता

जीना जानता है,

बिना वजह

खुश रहना भी।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

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