प्रेम के बाद का अकेलापन
अकेलापन!
मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ
लेकिन तुम तो सब जानते हो
तुम तो वहीं से शुरू होते हो
जहाँ प्रेम खत्म होता है…
अकेलापन!
जब वो थी
तो तुम कहीं नहीं थे
या शायद थे भी
तो इतने हल्के
कि महसूस ही नहीं हुए
अब तुम इतने गहरे हो
कि हर सांस में उतर आते हो…
अकेलापन!
उसके जाने के बाद
कमरा वही है
बिस्तर वही है
तकिया वही है
बस
नींद नहीं है…
अकेलापन!
पहले फोन बजता था
उसका नाम आता था
दिल मुस्कुरा देता था
अब फोन बजता है
तो बस
आवाज़ आती है…
कोई नहीं आता…
अकेलापन!
उसकी हँसी
अब भी याद है
उसकी बातें
अब भी कानों में हैं
लेकिन अब
ये सब यादें
तुम्हारी तरफ से आती हैं
जैसे कोई धीरे-धीरे
जख्म कुरेद रहा हो…
अकेलापन!
पहले मैं उससे बात करता था
अब खुद से करता हूँ
और कई बार
खुद ही जवाब देता हूँ
जैसे वो अब भी
मेरे अंदर कहीं रह गई हो…
अकेलापन!
उसके बाद
कई लोग मिले
कई चेहरे
कई आवाज़ें
लेकिन कोई भी
उस “जगह” तक नहीं पहुँचा
जहाँ वो थी…
अकेलापन!
मैंने उसकी चीज़ें हटाईं
उसके मैसेज डिलीट किए
उसकी तस्वीरें छुपा दीं
लेकिन तुम
किसी फाइल में नहीं थे
तुम तो
सीधे दिल में सेव थे…
अकेलापन!
लोग कहते हैं
समय सब ठीक कर देता है
शायद कर भी देता हो
लेकिन कुछ खाली जगहें
ठीक नहीं होतीं
बस
आदत बन जाती हैं…
अकेलापन!
अब मैं तुम्हारे साथ जीना सीख रहा हूँ
जैसे किसी अधूरी कहानी के साथ
जिसका अंत नहीं होता
और शायद
हर प्रेम के बाद
यही सबसे सच्चा रिश्ता होता है —
तुम और मैं…
अकेलापन!
एक बात बताऊँ?
अगर वो कभी लौट भी आए
तो शायद
मैं पहले जैसा न रहूँ
क्योंकि तुमने
मुझे बदल दिया है…
मुकेश ,,,,,,,
No comments:
Post a Comment