ख़ामोशी
१
मैंने चुप रहकर भी बहुत कुछ कह दिया,
वो सुन न सका तो कसूर किसका था
मेरी ख़ामोशी, मेरी ज़ुबान थी।
२
हर बार उसने पूछा, “क्या हुआ है तुम्हें?”,
मैंने मुस्कुराकर बात टाल दी
कुछ जवाब औरतें बचाकर रखती हैं।
३
मैं बोलती तो शायद हल्का हो जाती,
पर चुप रही तो और गहरी हो गई
औरतें दर्द नहीं, अर्थ सँभालती हैं।
No comments:
Post a Comment