1.
सर्द सुबह में
जब तुम
बाल समेटती हो
तुम्हारी उँगलियों से
भाप उठती है
जैसे
कोई नदी
धीरे-धीरे
जाग रही हो।
2.
तुम्हारी हँसी
जाड़े की धूप है
धीरे से गिरती है
और
मेरे ठंडे दिनों को
गरम कर जाती है।
3.
जब तुम
दुपट्टा लपेटती हो
चेहरा आधा छुप जाता है
बाकी आधे में
इतनी रोशनी होती है
कि
पूरा दिन निकल आए।
4.
तुम्हारी साँसें
सर्द हवा में
दिखने लगती हैं
और मुझे लगता है
तुम
अपनी बातों को
धुंए में बदलकर
आसमान पर लिख रही हो।
5.
तुम्हारे गाल
ठंड से
थोड़े और लाल हो जाते हैं
जैसे
किसी ने
सेबों पर
हल्की धूप रख दी हो।
6.
जब तुम
हाथ रगड़ती हो
तो लगता है
दो चिड़ियाँ
आपस में
गर्मी बाँट रही हों।
7.
जाड़े की शाम में
तुम्हारी चुप्पी भी
गरम लगती है
जैसे
अलाव के पास बैठा
कोई अपना
कुछ कहे बिना
सब कह दे।
मुकेश ,,
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