परिभूः” — सर्वोत्कृष्ट, सर्वाधिष्ठाता ब्रह्म का शांकरार्थ (अष्टम मन्त्र)
मूल पदांश (संशोधित रूप में)
परिभूः = सर्वेषां परि उपरि भवति इति परिभूः।
जो सबके ऊपर, सब से परे और श्रेष्ठ है—वही “परिभूः” है।
यह पद ईशावास्योपनिषद् के अष्टम मन्त्र में वर्णित ब्रह्म के स्वरूप का एक और महत्वपूर्ण विशेषण है—“परिभूः”। शंकराचार्य इसकी व्याख्या करते हुए बताते हैं कि ब्रह्म केवल सर्वव्यापक ही नहीं, बल्कि सर्वोपरि और सर्वाधिष्ठाता भी है।
“परिभूः” शब्द का निर्माण “परि” (चारों ओर, सर्वतः) और “भू” (स्थित होना, होना) धातु से हुआ है।
शंकराचार्य इसका अर्थ करते हैं—“सर्वेषां परि उपरि भवति”—
अर्थात् जो सबके ऊपर है, जो सबको व्याप्त करते हुए भी उनसे परे है।
यहाँ “ऊपर” का अर्थ स्थानगत (spatial) नहीं है, बल्कि तात्त्विक श्रेष्ठता (ontological supremacy) है।
अर्थात् ब्रह्म सभी वस्तुओं का आधार है, परंतु स्वयं किसी पर आधारित नहीं है।
संसार की प्रत्येक वस्तु
कारण-कार्य संबंध में बंधी है
किसी अन्य पर निर्भर है
परिवर्तनशील और सीमित है
परंतु ब्रह्म इन सब से भिन्न है,
वह स्वतंत्र (स्वतन्त्र), अनादि, अनन्त और अपरिवर्तनीय है।
इसलिए उसे “परिभूः” कहा गया है,
वह सबका अधिष्ठान है, परंतु स्वयं किसी का आश्रित नहीं।
यहाँ एक महत्वपूर्ण अद्वैत सिद्धांत प्रकट होता है—
ब्रह्म ही एकमात्र सत्य है, और जगत् उसी पर आश्रित है।
जगत् ब्रह्म में स्थित है, उससे उत्पन्न होता है और उसी में लीन हो जाता है—
परंतु ब्रह्म इन सभी परिवर्तनों से अप्रभावित रहता है।
एक दृष्टांत से इसे समझा जा सकता है
जैसे स्वर्ण से बने आभूषण स्वर्ण पर आश्रित होते हैं,
परंतु स्वर्ण स्वयं किसी विशेष आभूषण पर निर्भर नहीं होता;
उसी प्रकार, जगत् ब्रह्म पर आश्रित है, परंतु ब्रह्म स्वतंत्र है।
“परिभूः” का एक और अर्थ यह भी है कि
वह सभी सीमाओं (देश, काल, वस्तु) से परे है।
इसलिए उसे कोई सीमित नहीं कर सकता, न ही उससे ऊपर कुछ और है।
इस प्रकार, यह पद ब्रह्म की परम स्वतंत्रता, सर्वोच्चता और सर्वाधारत्व को व्यक्त करता है।
“परिभूः” पद के माध्यम से शंकराचार्य ब्रह्म को सर्वश्रेष्ठ, सर्वाधिष्ठाता और सर्वथा स्वतंत्र सत्ता के रूप में निरूपित करते हैं। वह सबमें व्याप्त होते हुए भी सब से परे है और किसी पर निर्भर नहीं है। यही अद्वैत वेदान्त में ब्रह्म की परम स्थिति है, जो उसे एकमात्र सत्य और शेष सबको आश्रित सिद्ध करती है।
मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,,
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