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Wednesday, 22 April 2026

खाली चौखट

 खाली चौखट


1

खाली चौखट

कोई दरवाज़ा

अब लौटकर नहीं आता।


2

दहलीज़ पर धूप है,

पर कदमों की आहट

कहीं खो गई है।


3

एक समय

यहीं से हँसी गुज़रती थी,

अब हवा भी

धीरे-धीरे चलती है।


4

चौखट के किनारों पर

हाथों के निशान हैं

जैसे विदाई

अब भी ठहरी हो।


5

कोई नाम

धीरे से पुकारो,

आवाज़ लौटकर

यहीं बैठ जाती है।


6

शाम होते ही

ये और खाली लगती है,

जैसे किसी का इंतज़ार

अभी बाकी हो।


7

दीवारें चुप हैं,

पर चौखट

सब कुछ जानती है।


8

कभी कोई

अचानक आ जाए

इस उम्मीद में

वो अब भी खड़ी है।


9

खाली चौखट

घर नहीं छोड़ती,

बस अपने भीतर

सबको जाते हुए देखती है।


10

एक दिन

वो भी थक जाएगी

और घर

सचमुच सूना हो जाएगा।


मुकेश ,,,,,,,,,,

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