सिलवटों वाली चादर
1
सिलवटों वाली चादर
रात भर कोई
नींद से जूझता रहा है।
2
कहीं गहरी शिकन है,
जैसे कोई सपना
अचानक टूट गया हो।
3
एक कोना उलझा हुआ
शायद वहाँ
कोई हँसी ठहरी थी।
4
कपड़े की हर तह
कुछ कहती है—
किसी की बेचैनी,
किसी की राहत।
5
सीधी नहीं होती पूरी,
जैसे ज़िंदगी
हर सुबह
थोड़ी-सी बिखरी रहती है।
6
कहीं हल्की-सी गर्माहट है,
जैसे कोई
अभी-अभी उठा हो।
7
एक तरफ़ खिंची हुई
शायद कोई
दूर जाने की कोशिश में था।
8
सिलवटों में
उँगलियों के निशान हैं,
जैसे रात भर
कोई ख़ुद को टटोलता रहा।
9
सुबह की धूप में
वो सब साफ़ दिखता है
जो रात ने
चुपचाप छुपा लिया था।
10
सिलवटों वाली चादर
कभी आलस,
कभी मोहब्बत,
और कभी अकेलापन ओढ़े रहती है।
मुकेश ,,,,,,,,,,
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