वो—जिसके बारे में मुझे कुछ भी मालूम नहीं
इतने अरसे बाद भी
मुझे नहीं मालूम
वो किस company का इत्र लगाती है,
किस रंग की lipstick उसे रास आती है,
उसे साड़ियों में क्या पसंद है—
कांजीवरम की शान,
या बनारसी की रवानी,
या शिफॉन की नर्मी,
या लखनवी चिकन की सादगी…
या फिर कोई और
जिसका मुझे इल्म ही नहीं।
मुझे ये भी नहीं मालूम
उसे खाने में क्या भाता है,
कब वो बीमार होती है,
कब उदास,
कब थकी हुई सी
किस बात पर
उसकी आँखें चमक उठती हैं,
और किस लम्हे
वो ख़ामोश होकर
अपने ही भीतर सिमट जाती है।
मुझे ये भी नहीं पता
वो रात को जल्दी सो जाती है
या देर तक जागती है,
दरअसल
मुझे उसके बारे में
कुछ भी नहीं मालूम,
सिवाय इसके कि
वो एक
निहायत प्यारी सी दोस्त है,
और…
मुझे अच्छी लगती है।
पर अजीब बात ये है
उसे मेरे बारे में
बिना पूछे, बिना जाने
सब कुछ मालूम है।
उसे पता है
मैं deo नहीं लगाता,
मुझे थोड़ा बेतरतीब रहना पसंद है,
चमक-दमक वाले कपड़े
मुझ पर जंचते नहीं।
उसे ये भी मालूम है
मुझे रोज़-रोज़ shave करने में
उलझन होती है,
मैं रात देर तक पढ़ता हूँ,
और पढ़ते-पढ़ते
एक-आध cigarette भी सुलगा लेता हूँ।
उसे ये भी पता है
मुझे hot coffee पसंद है,
हालाँकि
मुझे बहुत बाद में मालूम हुआ
कि उसे cold coffee भाती है।
हाँ, ये भी
किसी यूँ ही गुज़रती बात में
पता चला
उसे chocolate से
कुछ ख़ास मोहब्बत है।
उसे मालूम है
मुझे सादी
या चेक वाली शर्ट्स पसंद हैं,
मैं अक्सर
तन्हा टहलने निकल जाता हूँ,
और…
मैं एक हद तक
लापरवाह इंसान हूँ।
मैं हैरान होता हूँ
कैसे उसे
मेरी हर आदत का इल्म है,
और मुझे
उसकी दुनिया का
किनारा भी नसीब नहीं।
शायद…
औरतें ख़याल रखने की
फ़ितरत लेकर पैदा होती हैं
वो पूछती नहीं,
समझ लेती हैं…
वो बताती नहीं,
महसूस कर लेती हैं…
और हम
बस यूँ ही
उनके इस ख़ामोश एहसास में
अपनी पूरी कहानी
छुपाए फिरते हैं।
वो—जिसके बारे में मुझे कुछ भी मालूम नहीं,
शायद वही
मुझे सबसे ज़्यादा समझती है।
मुकेश ,,,,,,,
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