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Sunday, 5 April 2026

तुम्हारी आवाज़ और रातरानी की महक

 तुम्हारी आवाज़ और रातरानी की महक


वो लड़की…

ठीक-ठीक कवि नहीं थी

पर लिखती थी

और लिखती भी क्या—

बस स्टेटस,

दो-तीन लाइन,

कभी आधी रात को,

कभी बिना वजह।


मेरी वाल पर भी

आ ही जाती थी कभी-कभी,

कुछ नहीं कहती—

बस “🙂”

या “हम्म…”

या फिर

एक आधा-सा वाक्य

जिसमें पूरा मतलब नहीं होता था।


उसकी आवाज़…

पहली बार सुनी थी

किसी पुराने वॉइस नोट में—

बहुत धीमी,

जैसे खुद से भी छुपती हुई।


तब समझ नहीं आया था

पर अब लगता है

वो आवाज़

रातरानी की महक जैसी थी—


रात में आती,

चुपचाप,

और सुबह होते-होते

कहीं खो जाती।


एक दिन उसने लिखा था

“नींद नहीं आती आजकल”


बस इतना ही।

न कोई वजह,

न कोई विस्तार।


उस पोस्ट पर

52 कमेंट्स थे

और 200 के आसपास लाइक्स।


सबने वही कहा—

“सो जाओ…”

“म्यूज़िक सुनो…”

“सब ठीक हो जाएगा…”


मैंने कुछ नहीं लिखा।


धीरे-धीरे

उसके स्टेटस कम होते गए।


ऑनलाइन दिखती थी

पर जैसे कहीं और होती थी।


मैंने एक बार पूछा भी—

“आवाज़ क्यों नहीं भेजती अब?”


उसने रिप्लाई किया—

“मन नहीं करता।”


बस।


फिर एक दिन

अचानक एक वॉइस नोट आया।


सिर्फ़ 7 सेकंड का।


कुछ बोली नहीं वो—

बस हल्की-सी साँस थी,

और दूर कहीं

कोई दरवाज़ा बंद होने की आवाज़।


मैंने कई बार सुना उसे।


उसके बाद

वो बिल्कुल चुप हो गई।


न स्टेटस,

न इमोजी,

न “हम्म…”


सिर्फ़ प्रोफ़ाइल पिक्चर बची थी—

जिसमें चेहरा साफ़ नहीं दिखता था।


किसी ने बताया

शायद कहीं शिफ्ट हो गई है

या नंबर बदल लिया है

या…


ख़ैर,

पक्का किसी को कुछ नहीं पता।


अब कभी-कभी

रात में

अचानक

उसकी याद आती है।


जैसे

रातरानी की महक—

बिना वजह,

बिना आवाज़ के।


सोचता हूँ

मैसेज करूँ क्या?


फिर याद आता है—

आख़िरी बार

उसने जवाब नहीं दिया था।


वैसे…

अनफॉलो कर ही दूँ शायद।


इतनी भी खास नहीं थी उसकी आवाज़

कि हर रात

याद रखी जाए।


मुकेश ,,,,,,,,,,,

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