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Thursday, 2 April 2026

खेल अब प्रतियोगिता बन चुका है

 खेल अब प्रतियोगिता बन चुका है


1.

खेल अब

खेल नहीं रहा

उसके माथे पर

अंक लिख दिए गए हैं।


2.

जहाँ

हँसी गूँजती थी पहले

अब

सीटी बजती है

और

स्कोरबोर्ड चमकता है।


3.

मैंने

बच्चों को खेलते देखा

पर

उनकी आँखों में

खुशी से ज़्यादा

डर था।


4.

हर पास, हर शॉट

अब

किसी जीत का हिस्सा है

और

हर चूक

किसी हार का बोझ।


5.

कोच

अब

खिलाड़ी नहीं बनाते

विजेता बनाते हैं

और

विजेता

कभी-कभी

खेलना भूल जाते हैं।


6.

एक बच्चा

हारकर रो रहा था

किसी ने कहा, “सीखो!”

पर

किसी ने यह नहीं पूछा

“तुम खेले थे

या सिर्फ़ जीते थे?”


7.

मैदान

अब

मिट्टी का नहीं रहा

वो

करियर का नक्शा बन गया है।


8.

मैंने

गली के खेल याद किए

जहाँ

कोई ट्रॉफी नहीं थी

फिर भी

हर कोई विजेता था।


9.

ज़िन्दगी

शायद

खेल की तरह थी

हमने

उसे

प्रतियोगिता बना दिया।


10.

ऐसे भी खिलाड़ी हैं

जो जीतकर भी

खाली हैं

और

ऐसे भी

जो हारकर भी

भरे हुए हैं।


11.

खेलो ज़रूर

पर

खेल को

खेल रहने दो


क्योंकि

जब खेल

सिर्फ़ जीत बन जाता है

तो

हार

हमेशा

हमारे भीतर होती है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,,

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