लिखने वाले ज़्यादा, पढ़ने वाले कम होते जा रहे हैं
1.
अब
हर हाथ में एक कलम है
पर
हर आँख में
पढ़ने का सब्र नहीं।
2.
लोग
लिख रहे हैं
तेज़, लगातार,
बिना रुके
जैसे
शब्द ही
उनकी साँस हों।
3.
पर
पढ़ने वाला
ठहरता है
और
ठहरना
अब
सबको मुश्किल लगता है।
4.
मैंने
एक अच्छी कविता लिखी
लोगों ने
“लाइक” किया
पर
किसी ने
उसे पढ़ा नहीं।
5.
शब्द
अब
दिखाने के लिए हैं
समझने के लिए नहीं
जैसे
आईना हो
जिसमें
बस खुद को देखना है।
6.
पढ़ना
एक रिश्ता था
धीमा, गहरा
अब
वो
स्क्रॉल में टूट जाता है।
7.
हर कोई
अपनी कहानी लिख रहा है
पर
दूसरे की कहानी में
किसी की दिलचस्पी नहीं।
8.
मैंने
कभी-कभी
खुद को भी
नहीं पढ़ा
और
फिर
दुनिया को दोष दिया।
9.
ज़िन्दगी
शायद
लिखने और पढ़ने के बीच
एक संतुलन थी
हमने
एक पलड़ा
भारी कर दिया।
10.
ऐसे भी लोग हैं
जो
कम लिखते हैं
पर
बहुत पढ़ते हैं
शायद
वही
ज़्यादा समझते हैं।
11.
लिखना मत छोड़ो
पर
कभी-कभी
रुककर
पढ़ भी लेना
क्योंकि
दूसरों के शब्दों में ही
कई बार
अपना सच मिलता है।
मुकेश ,,,,,,
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