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Saturday, 25 April 2026

कुछ रास्ते तुम्हें कहीं पहुँचाने के लिए नहीं होते,

 कुछ रास्ते

तुम्हें कहीं पहुँचाने के लिए नहीं होते,

बस तुम्हारे भीतर उतरने के लिए होते हैं।


तुम चलते हो

धीरे-धीरे,

और अचानक महसूस करते हो

कि यह सफ़र बाहर का नहीं,

भीतर का है।


एक मोड़ आता है—

जहाँ हवा भी ठहर जाती है,

और तुम

अपना नाम लेकर पुकारते हो खुद को।


आवाज़ जाती है दूर तक—

पहाड़ों से टकराती,

खामोशियों में खोती,

फिर लौट आती है…


थोड़ी बदली हुई,

थोड़ी और गहरी।


तुम पहचानते हो—

यह वही आवाज़ है,

पर इसमें अब

तुम्हारी तन्हाई घुल गई है,

और एक अनकहा अपनापन भी।


समय की इस घाटी में

कोई और नहीं रहता—

सिर्फ़ तुम,

और तुम्हारी लौटती हुई ध्वनि।


उसे सुनो—

वो शिकायत नहीं,

वो खालीपन नहीं…


वो तुम्हारा ही स्पर्श है,

जो देर से सही,

पर तुम्हें छूने वापस आया है।


और जब तुम समझते हो

कि यह गूँज ही तुम्हारा उत्तर है

तब जान लेते हो


कि प्रेम

हमेशा सामने से नहीं आता,

कभी-कभी

वो तुम्हारी ही आवाज़ बनकर

तुम तक लौटता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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