होम | रोज़नामचा | कविताएँ | कहानियाँ | विचार | ज्योतिष | लेखक

Monday, 27 April 2026

तुम—शेड्स और मैं

 तुम—शेड्स और मैं


तुम

ड्रेस, माहौल और मौके के हिसाब से

लिपस्टिक के शेड चुनती हो

जैसे हर दिन

एक नया अर्थ पहनती हो।


कभी हल्का,

कभी गहरा,

कभी बस एक आभा भर…

तुम्हारे पास रंगों की

एक पूरी दुनिया है।


और मैं

मेरी ज़िंदगी में

इतने शेड कहाँ…


मेरे हिस्से तो

बस एक ही रंग आया है

तुम्हारा।


वही गेहुँआ-सा उजास,

जिसमें धूप भी है

और मिट्टी की सोंधी गंध भी

वही मूंगिया आभा,

जो होंठों से निकलकर

चेहरे, आवाज़, और खामोशी तक फैल जाती है।


तुम्हारी बाँहों का रंग,

जैसे कोई थका हुआ दिन

आकर ठहर जाए—

तुम्हारे गालों की हल्की गरमाहट,

जैसे कोई बात

कहते-कहते रह गई हो…


और फिर

वो “और…”

जो शब्दों में नहीं आता,

पर हर बार

थोड़ा-थोड़ा बढ़ जाता है।


तुम्हारे पास

चुनने के लिए कई शेड हैं

और मेरे पास

बस तुम हो…


और अजीब बात ये है

कि इस एक रंग में ही

मेरी पूरी दुनिया बसती है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,

No comments:

Post a Comment