सोलहवाँ तमाशा -कवि का तमाशा

 सोलहवाँ तमाशा -कवि का तमाशा


कवि

दूसरों के दुख पर

बहुत सुंदर कविताएँ लिखता है।


मगर कई बार

अपने सबसे क़रीबी आदमी की चुप्पी

नहीं सुन पाता।


वह शब्दों में

बहुत संवेदनशील होता है,

जीवन में

कभी-कभी उतना नहीं।


और फिर भी

उसे लगता है

वह दुनिया को समझता है।


मुकेश ,,,,,,,,,,,,,

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