“यह उस मनुष्य का रोज़नामचा है जो समय की दौड़ से थोड़ा बाहर खड़ा है और साधारण दिनों में असाधारण अर्थ खोजता है।”
कोहरे वाला प्लेटफ़ॉर्म
कोहरे में
आज प्लेटफ़ॉर्म
अपना ही चेहरा भूल गया है।
ट्रेन की सीटी
बहुत दूर से आती है,
जैसे कोई स्मृति
धुँध के भीतर रास्ता खोज रही हो।
मुकेश ,,,,,,,,
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